अनुभूति को एक आयाम चाहिए। शायद लेखन से बड़ी कोई अनुभूति नहीं होती। जो सुकून इसमें है, वह किसी में नहीं। इसलिए लिखता हूं। अकेला नहीं, आपके साथ। सबके साथ। जज्बातों के साथ, तसव्वुर के साथ, जिंदगी के साथ, लहरों के साथ। मन के साथ। जग के साथ। क्यों लिखें? यह विषय नही होना चाहिए। क्यों न लिखें, यह सबसे बड़ा प्रत्युत्तर है।